जाने भारत में
भगवान के पास है
कुल
कितनी संपत्ति
भारत देश में कई ऐसे मंदिर हैं, जो काफी प्रसिद्ध हैं। हर साल लाखों श्रद्धालु मंदिरों में माथा टेकने के
लिए आते हैं। जाने भारत के दस सबसे अमीर मंदिर जहां सबसे ज्यादा श्रद्धालु दर्शन
के लिए आते हैं।
पद्मनाभ
स्वामी मंदिर
पद्मनाभ
स्वामी मंदिर भारत का सबसे अमीर मंदिर है। यह तिरुवनंतपुरम् शहर के बीच में स्थित
है। इस मंदिर की देखभाल त्रावणकोर के पूर्व शाही परिवार की ओर से की जाती है। यह
मंदिर बहुत प्राचीन है और द्रविड़ शैली में बनाया गया है। मंदिर की कुल एक लाख
करोड़ की संपत्ति है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की विशाल मूर्ति विराजमान
है। इसे देखने के लिए हजारों भक्त दूर-दूर से यहां आते हैं। आपकों बता दें कि इस
प्रतिमा में भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं। मान्यता है कि
तिरुअनंतपुरम नाम भगवान के अनंत नामक नाग के नाम पर ही रखा गया है। यहां पर भगवान
विष्णु की विश्राम अवस्था को पद्मनाभ कहा जाता है और इस रूप में विराजित भगवान
पद्मनाभ स्वामी के नाम से विख्यात हैं। केरल के पद्मनाभस्वामी
मंदिर के छठे दरवाजे के
खोलने संबंधी फैसला सुना सकती है। इस मंदिर के पांच दरवाजे खोले जा चुके हैं और
इसमें से निकले धन को देखकर सभी की आंखे चौंधिया गई थी।
इस मंदिर की देखभाल त्रावणकोर का राजपरिवार करता रहा है और एक भक्त की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसके तहखाने के दरवाजे खोलने का आदेश दिया था। इसके पांच दरवाजे खोले जा चुके हैं और छठा दरवाजा खोलने पर किसी अनिष्ट की आशंका के चलते रोक लगा दी गई थी। अनुमान है कि मंदिर में मिलने वाले खजाने की कीमत 1 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। पद्मनाभस्वामी मंदिर में मिले खजाने की बेशुमार संपत्ति को देखें तो लगेगा जैसे कोई सोने की खान हाथ लग गई हो। इस खजाने के मिलने के बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि मंदिर ट्रस्ट के पास करीब 70 हजार करोड़ रुपए के ऊपर सोने के जेवरात हैं। यानी तिरुपति मंदिर ट्रस्ट से ज्यादा। वर्तमान में तिरुपति मंदिर के पास सोने की कीमत करीब 52 हजार करोड़ रुपए है, और इसी वजह से इसे दुनिया का सबसे धनवान मंदिर कहा जाता है।
पद्मनाभस्वामी के खजाने में मिली वस्तुओं में सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहा 18 फुट लंबा सोने का हार है, जो 10.5 किलो का है। करीब 536 किलो सोने के भारतीय सिक्के, 20 किलो सोने के ब्रिटिश सिक्के। यह सब शुक्रवार को मिला। इसमें तमाम सिक्के नेपोलियन के जमाने के हैं। ढेर सारे हीरे, मोती व दुलर्भ पत्थर भी इस खजाने में हैं।
इस मंदिर की देखभाल त्रावणकोर का राजपरिवार करता रहा है और एक भक्त की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसके तहखाने के दरवाजे खोलने का आदेश दिया था। इसके पांच दरवाजे खोले जा चुके हैं और छठा दरवाजा खोलने पर किसी अनिष्ट की आशंका के चलते रोक लगा दी गई थी। अनुमान है कि मंदिर में मिलने वाले खजाने की कीमत 1 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। पद्मनाभस्वामी मंदिर में मिले खजाने की बेशुमार संपत्ति को देखें तो लगेगा जैसे कोई सोने की खान हाथ लग गई हो। इस खजाने के मिलने के बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि मंदिर ट्रस्ट के पास करीब 70 हजार करोड़ रुपए के ऊपर सोने के जेवरात हैं। यानी तिरुपति मंदिर ट्रस्ट से ज्यादा। वर्तमान में तिरुपति मंदिर के पास सोने की कीमत करीब 52 हजार करोड़ रुपए है, और इसी वजह से इसे दुनिया का सबसे धनवान मंदिर कहा जाता है।
पद्मनाभस्वामी के खजाने में मिली वस्तुओं में सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहा 18 फुट लंबा सोने का हार है, जो 10.5 किलो का है। करीब 536 किलो सोने के भारतीय सिक्के, 20 किलो सोने के ब्रिटिश सिक्के। यह सब शुक्रवार को मिला। इसमें तमाम सिक्के नेपोलियन के जमाने के हैं। ढेर सारे हीरे, मोती व दुलर्भ पत्थर भी इस खजाने में हैं।
तिरूपति
बालाजी का मंदिर
तिरूपति बालाजी का मंदिर
आंध्रप्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित है। यह मंदिर वास्तुकला का अद्भुत नमूना
है। मंदिर सात पहाड़ों से मिलकर बने तिरूमाला के पहाड़ों पर स्थित है। जानकारी के
अनुसार तिरूमाला की पहाडिय़ां विश्व की दूसरी सबसे प्राचीन पहाडिय़ां है। इस तिरूपति
मंदिर में भगवान वेंकटश्वर निवास करते है। भगवान वेंकटश्वर को विष्णुजी का अवतार
माना जाता है। यह मंदिर समुद्र तल से 2800 फिट की
ऊंचाई पर स्थित है। इस मंदिर को तमिल राजा थोडईमाननें ने बनवाया था। इस
मंदिर में लगभग 50,000 श्रृद्धालु रोज दर्शन करने आते हैं। बालाजी
मन्दिर के पास इतनी संपति है कि ये देश के बजट के पांचवें हिस्से तक पहुंच गई है।
बालाजी के खजाने में इस वक्त करीब 50 हजार करोड़ रुपए हैं। सालाना करीब साढ़े 6 सौ
करोड़ कमाने वाले अरबपति भगवान बालाजी के खजाने का आज हम जायजा लेंगे अपनी खास
पेशकश स्पेशल रिपोर्ट में।
सरकार के खजाने में एक
बार में शायद इतनी दौलत न निकले जितनी दुनिया के सबसे धनवान मंदिर तिरुपति में है।
और सबसे धनी देवता हैं तिरुपति के बालाजी। जिनका खजाना देश के कुल बजट का करीब
पांचवां हिस्सा है और चढ़ावा इतना कि बोरियों में जमा करने की नौबत। पैसे की गिनती
के लिए यहां अलग से कर्मचारी मौजूद हैं।
भगवान बालाजी के खजाने
में करीब 50 हजार करोड़ रुपए जमा हैं। करीब 15 लाख लोग हर महीने भगवान बालाजी के
दर्शन करते हैं। अक्टूबर 2009 में तिरूपति में एक दिन का चढ़ावा तीन करो़ड़
पहुंचा। महीने भर में करीब 30-40 करोड़ रुपये की नगदी बालाजी को चढ़ाई जाती है।
चढ़ावे में लाखों के गहने, हीरे-जवाहरात और जमीनें भी शामिल हैं।
बालाजी के दर्शन करके
उनका आशीर्वाद पाने को रोज हज़ारों भक्त तिरुमला आते हैं। ज्यादातर अपनी हैसियत के
हिसाब से भगवान को कुछ न कुछ जरूर चढ़ाते हैं। भक्त मानते हैं कि यहां आने से हर
मुराद पूरी होती है तो ऐसे में भगवान वेंकटेश को कुछ पानफूल भेंट कर दिया जाए तो
इसमें बुरा क्या है। क्योंकि दान से पुण्य मिलता है।
करोड़पति भगवान बालाजी
के मंदिर में हर साल करीब 650 करोड़ रुपये से ज़्यादा चढ़ावा आता है। इसमें से
करीब 80 करोड़ रुपये का सिर्फ सोना होता है। 1945-46 में तिरुमला के बालाजी मंदिर
की सालाना आमदनी थी 37 लाख रुपये। 1970-71 में सालाना आय बढ़कर 9 करोड़ रुपये हो
गई। 1980-81 में तिरुमला के बालाजी मंदिर की आय थी 23 करोड़। 1990-91 में आय बढ़कर
108 करोड़ रुपये पहुंची।
पिछले कुछ साल से यहां
विदेशी करेंसी भी आने लगी है। अमेरिका, इंग्लैंड,
कनाडा, सिंगापुर, दक्षिण
अफ्रीका, मलेशिया जैसे 12 देशों की करेंसी यहां आती है।
मंदिर पुरोहितों और विद्वानों के मुताबिक दान वही है जो आपके पास है।
दरअसल भक्तों की आस्था
का कोई पैमाना नहीं होता और अगर बात तिरुपति के भगवान बालाजी की हो तो सभी पैमाने
टूट जाते हैं। यहां सिर्फ बाल कटने से करीब 100 करोड़ रुपये की कमाई हो जाती है।
यानि जो लोग मुंडन करवाते है उनके बाल बेचकर हर साल इतनी कमाई होती है। मुंडन के
लिए यहां खासतौर पर 1200 हेयर ड्रेसर नौकरी पर रखे हैं जो 12 महीने यहां आने वाले
भक्तों का बाल काटने का काम करते हैं। 650 करोड़ रुपए की वार्षिक आय के साथ तिरूपति
बालाजी भारत में दूसरा सबसे अमीर देवता है। अलग-अलग बैंकों में मंदिर का 3000
किलो सोना जमा और मंदिर के पास 1000 करोड़ के
रुपए फिक्स्ड डिपॉजिट हैं।
मंदिर का पैसा ब्याज पर
भी उठाया जाता है और मंदिर ब्याज से ही करोड़ों रुपए कमा लेता है। इसके अलावा
कैलेंडर और डायरियों की बिक्री मंदिर की जमीन के किराए का आमदनी में कोई हिसाब
नहीं है। मंदिर की आमदनी का एक और रास्ता है यहां लाखों की तादाद में बनने वाले
वीआईपी पास और प्रसाद।
श्री जगन्नाथ मंदिर-पुरी
पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर एक हिन्दू मंदिर
है, जो भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्ण) को समर्पित है। यह
भारत के उड़ीसा राज्य के तटवर्ती शहर पुरी में स्थित है। जगन्नाथ शब्द का अर्थ जगत
के स्वामी होता है। इनकी नगरी ही जगन्नाथपुरी या पुरी कहलाती है। इस मंदिर को
हिन्दुओं के चार धाम में से एक गिना जाता है। यह वैष्णव सम्प्रदाय का मंदिर है।
पुरी जगन्नाथ मंदिर भारत के दस अमीर मंदिरों में से एक है। इस मंदिर के लिए जो भी
दान आता है। वह मंदिर की व्यवस्था और सामाजिक कामों में खर्च किया जाता है। दामोदर के अनुसार, करीब 40 से 50 क्विंटल
चावल और 20 क्विंटल दाल समेत सब्जियों के इस्तेमाल से रोज़
यह ‘महाप्रसाद’ बनाया जाता है, जिसे काफी सस्ते दाम में बेचा जाता है। यह ‘महाप्रसाद’
सभी श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध है।"
एक कुडुआ (एक तरह का मिट्टी का बर्तन) की कीमत 50 रुपये में शुरू होती है, जिसमें चावल, तरह-तरह की दाल और सब्जियां होती हैं। सूत्रों के अनुसार, एक दिन में इस महाप्रसाद की बिक्री से करीब 8-10 लाख रुपये की आमदनी होती है।
एक कुडुआ (एक तरह का मिट्टी का बर्तन) की कीमत 50 रुपये में शुरू होती है, जिसमें चावल, तरह-तरह की दाल और सब्जियां होती हैं। सूत्रों के अनुसार, एक दिन में इस महाप्रसाद की बिक्री से करीब 8-10 लाख रुपये की आमदनी होती है।
साईं बाबा मंदिर
साईं बाबा एक भारतीय गुरु, योगी और फकीर थे, उन्हें
उनके भक्तों की ओर से संत कहा जाता है। उनके असली नाम, जन्म,
पता और माता पिता के संदर्भ में कोई सूचना उपलब्ध नहीं है। साईं
शब्द उन्हें भारत के पश्चिमी भाग में स्थित प्रांत महाराष्ट्र के शिरडी नामक कस्बे
में पहुंचने के बाद मिला। शिरडी साईं बाबा मंदिर भी यहीं बना हुआ है। साईं बाबा
मंदिर भारत के अमीर मंदिरों में से एक माना जाता है। दुनिया में भले ही मंदी आई
लेकिन शिरडी के मशहूर साईंधाम में मंदी का कोई असर नहीं दिखता। अनुमान के मुताबिक
तिरुपति भगवान के बाद शिरडी का साईं प्रसादालय सबसे अमीर धर्मस्थान बन चुका है। इस
साल मंदिर में आने वाले भक्तों की तादाद तो बढ़ी, साथ ही भक्त
दिल खोलकर दान भी कर रहे हैं।
कहते हैं कि साईं के दर से कोई
खाली हाथ नहीं जाता। और ये भी सच है कि साईं के दर पर कोई खाली हाथ नहीं जाता।
इसलिए तिरुपति भगवान के बाद अगर कोई भगवान सबसे अमीर हैं, तो वो हैं साईंबाबा। इस आस्था के पैमाने का अंदाजा
लगता है उनको मिलने वाले चढ़ावे से। करीब 240 करोड़ रुपए सालाना।
साईं सबसे लोकप्रिय भगवान हैं
कोई भी उनका भक्त हो सकता है। इसलिए हर धर्म, भाषा, संप्रदाय और देश के लोग साईं के भक्त हैं।
भक्तों की संख्या बढ़ रही है तो जाहिर है कि चढ़ावे में भी बढ़ोतरी हो रही है।
दान ही नहीं, लोकप्रियता के मामले में साईं बाबा ने सबको पीछे
छोड़ दिया है। दुकानदार बताते हैं कि साईं बाबा की तस्वीरों और पोस्टरों की डिमांड
दूसरे सभी भगवानों से ज्यादा है।
लोकप्रियता के कंपीटिशन में
साईं सबको पीछे छोड़ चुके हैं। हां दान के मामले में वो अभी बालाजी के बाद तीसरे
नंबर पर हैं। लेकिन चढ़ावे के रिकॉर्ड तोड़ आंकड़े बता रहे हैं कि शायद जल्द ही
बालाजी को नंबर दो वन की गद्दी छोड़नी पड़े।
सिद्घिविनायक
मंदिर
सिद्घिविनायक गणेश जी का सबसे लोकप्रिय रूप
है। गणेश जी की जिन प्रतिमाओं की सूड़ दाईं तरह मुड़ी होती है, वे सिद्घपीठ से जुड़ी होती हैं और उनके मंदिर सिद्घिविनायक मंदिर कहलाते
हैं। सिद्धि विनायक की महिमा अपरंपार है, वे भक्तों की
मनोकामना को तुरंत पूरा करते हैं।मान्यता है कि ऐसे गणपति बहुत ही जल्दी प्रसन्न
होते हैं और उतनी ही जल्दी कुपित भी होते हैं। सिद्धी विनायक मंदिर भारत के रईस
मंदिरों में से एक माना जाता है। इस मंदिर को 3.7 किलोग्राम
सोने से कोट किया गया है, जो कि कोलकत्ता के एक व्यापारी ने
दान किया था। मुंबई में स्थित सिद्धिविनायक मंदिर, महाराष्ट्र राज्य में दूसरा
सबसे अमीर मंदिर है। सिद्धिविनायक मंदिर की सालाना आय 46 करोड़
रुपए है वहीं 125 करोड़ रुपए फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा है।
वैष्णो देवी मंदिर-कटरा-जम्मू
भारत में हिन्दूओं का पवित्र तीर्थस्थल
वैष्णो देवी मंदिर है जो त्रिकुटा हिल्स में कटरा नामक जगह पर 1700 मी. की ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर के पिंड एक गुफा में स्थापित है, गुफा की लंबाई 30 मी. और ऊंचाई 1.5 मी. है। लोकप्रिय कथाओं के अनुसार देवी वैष्णों इस गुफा में छिपी और एक
राक्षस का वध कर दिया। मंदिर का मुख्य आकर्षण गुफा में रखे तीन पिंड है। इस मंदिर
की देखरेख की जिम्मेदारी वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की है। आंध्र प्रदेश के तिरुमला
वेंकटेश्वर मंदिर के बाद इसी मंदिर में भक्तों द्वारा सबसे ज्यादा दर्शन किए जाते
है। यहां हर साल लगभग 500 करोड़ का दान आता है।
सोमनाथ मंदिर-गुजरात
सोमनाथ एक महत्वपूर्ण हिन्दू मंदिर है जिसकी
गिनती 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप
में होती है। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह पर स्थित इस मंदिर के
बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था। इसका उल्लेख ऋग्वेद
में भी मिलता है। इसे अब तक 17 बार नष्ट किया गया है और हर
बार इसका पुनर्निर्माण किया गया। सोमनाथ में हर साल करोड़ों को चढ़ावा आता है।
इसलिए ये भारत के अमीर मंदिरों में से एक है।
गुरुवयुर मंदिर-केरल
गुरुवयुर
श्री कृष्ण मंदिर गुरुवयुर केरला में स्थित है। यह मंदिर विष्णु भगवान का सबसे
पवित्र मंदिर माना जाता है। कहा जाता है कि यह मंदिर लगभग 5000 साल पुराना है।
गुरुवयुर मंदिर वैष्णवों की आस्था का केंद्र है। अपने खजाने के कारण यह मंदिर भी
भारत के 10 सबसे अमीर मंदिरों में से एक है। केरल
देवासन बोर्ड के अधीन भगवान कृष्ण के इस मंदिर की सालाना आय 2.5 करोड़ रुपए है और लगभग 125 करोड़ रुपए फिक्स्ड
डिपॉजिट में जमा है।
काशी विश्वनाथ मंदिर-वाराणसी
काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों
में से एक है। यह मंदिर वाराणसी में स्थित है। काशी विश्वनाथ मंदिर का हिंदू धर्म
में एक विशिष्ट स्थान है। ऐसा माना जाता है कि एक बार इस मंदिर के दर्शन करने और
पवित्र गंगा में स्नान कर लेने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। वर्तमान मंदिर का
निर्माण महारानी अहिल्या बाई होल्कर द्वारा सन 1780 में
करवाया गया था। बाद में महाराजा रंजीत सिंह द्वारा 1853 में 1000
कि.ग्रा शुद्ध सोने द्वारा मढ़वाया गया था। काशी विश्वनाथ भी भारत
के अमीर मंदिरों में से एक है। यहां हर साल करोड़ों का चढ़ावा आता है।
मीनाक्षी अम्मन मंदिर-मदुरै
तमिलनाडु में मदुरै शहर में स्थित मीनाक्षी
अम्मन मंदिर प्राचीन भारत के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है। मीनाक्षी
अम्मन मंदिर विश्व के नए सात अजूबों के लिए नामित किया गया है। यह मंदिर भगवान शिव
व मीनाक्षी देवी पार्वती के रूप के लिए समर्पित है। मीनाक्षी मंदिर पार्वती के
सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। मंदिर का मुख्य गर्भगृह 3500 वर्ष से अधिक पुराना माना जा रहा है। यह मंदिर भी अमीर मंदिरों में से एक
माना जाता है।
श्री हनुमान, शनि मंदिर
भी कमाई की दौड़ में
भगवान शनि अगर चाहें तो आपको अर्श
पर पहुंचा सकते हैं और अगर उनकी नजर बदल गई तो कोई उनके कोप से नहीं बचा सकता। ऐसी
भक्तों की मान्यता है। भागदौड़ से भरी जिंदगी में भक्त शनि महाराज को कुपित नहीं
करना चाहता। इसलिए शनि मंदिरों में
श्रद्धालुओं की तादाद भी बढ़ रही है और चढ़ावा भी।
तिरुपति के बालाजी और शिरडी के साईं इनके बाद तीसरे नंबर पर जिस भगवान
को लोग सबसे ज्यादा चाहते हैं वो हैं शनि महाराज। अमीर हो या गरीब। कोई भी शनि की
टेढ़ी नजर नहीं चाहता। इसलिए चाहे शनि मंदिर छोटे हों या बड़े। वहां लगातार भक्तों
की तादाद भी बढ़ रही है और चढ़ावा भी। करीब एक साल पहले तक दिल्ली के शनि मंदिर
में जहां 20-25 भक्त ही पहुंचते थे अब उनकी औसत तादाद हजारों में हो गई है।
राजधानी
दिल्ली में शनि के बाद सबसे ज्यादा अहम भगवान हैं हनुमान। जहां पहुंचने वालों में
केवल पुरुष ही नहीं, महिलाएं भी हैं। हनुमान जी को चढ़ावा भी अब
लाखों में पहुंच चुका है। शनि महाराज हों या हनुमानजी। फिलहाल सभी नफे में हैं।
चाहे देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़े, न पड़े। लेकिन भक्त भगवान के चढ़ावे में कहीं कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना
चाहता।

























बहुत अच्छी जानकारी मिली।
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